आज की सुबह के बारे में कुछ लिखने को दिल चाहता है
पर क्या लिखू मेरा मन समझ नही पाता है
वह पर्वत के पीछे से उदय हो रहा सूर्य, जैसे मुझे अपनी और बुलाता है
कैसे इस सुंदर सुबह को कागज पर उतारू, मेरा मन यही सोचता जाता है
आज की सुबह के बारे में कुछ लिखने को दिल चाहता है...
वो घास पर परी ओस की बुँदे, जिन्हें सूर्य हीरों सा चमकाता है
वह हीरों जड़ा घास मुझे आकर्षित करता जाता है
आज की इस सुबह को कैसे वर्णित करूँ, मेरा मन समझ नही पाता है
आज की सुबह के बारे में कुछ कहने को दिल चाहता है...
वह पेड़-पोधो के पत्तो से टकराती पवन, जिस से हर पत्ता हिलता जाता है
वह फूलों के मुख से आती सुगंध, जिस से मन हर्षित होता जाता है
इतनी अच्छी सुबह के उपहार के लिए, इश्वर का धन्यवाद करने को दिल चाहता है
आज की सुबह के बारे में कुछ कहने को दिल चाहता है...
वह पक्षियों का चेह्चहाना, जिसे बार बार सुनने को दिल चाहता है
वो झरने के गिरने की कल-कल, जिस के किनारे बठे रहने को दिल चाहता है
इस सुबह में है अजब आकर्षण, जिस से दूर होने को दिल नही चाहता है
ऐसी प्यारी सुबह के बारे में, कुछ तो लिखने को दिल चाहता है...
प्रकृति की इस अदभुत संरचना को, कागज़ सँभाल नही पाता है
मैं कुछ लिखना भी चहुँ, तो कोई शब्द स्मरण नही आता है
फ़िर भी चाहता हूँ की कुछ लिखूं, पर लिखते लिखते हाथ रुक सा जाता है
आज की सुबह के बारे में कुछ लिखने को दिल चाहता है....