आज मन में अजब सी खुशी सी है,
होंठों पर एक अनजानी हसीं सी है,
तनहा बैठा हूँ अपनी ही सोच में मगर,
फ़िर भी हो रही महसूस एक आहट सी है...
जैसे कोई अपनी और बुला रहा है,
जैसे कोई इस तन्हाई को मिटा रहा है,
बेशक नही है सामने नज़रों के,
पर हो रही महसूस किसी की मोजुदगी सी है...
कहाँ से आया ये, कौन है, कहाँ है,
कयूं मेरी नज़रों के दायरे से बाहर है,
कयूं छुपा है कहीं नजदीक मेरे,
आए सामने, यह सब जानने की जिज्ञासा सी है...
बताओ मुझे अगर कोई जानता है,
दिखाओ मुझे अगर कोई पहचानता है,
कोई सपना है या है हकीक़त,
अब तो मिलने की एक तमन्ना सी है...