सब लोग बदल गए हैं,
सब चेहरे अब नए हैं,
रहते थे जो संग हर पल,
वो साथी कहीं और चले गए हैं,
अब सब लोग बदल गए हैं,
सब चेहरे अब नए हैं!
स्मरण हैं वो पल जो संग बिताये थे,
स्मरण हैं वो उत्सव जो संग मनाये थे,
दुःख सुख के वो साथी अब कुछ दूर चले गए हैं,
सब लोग बदल गए हैं,
सब चेहरे अब नए हैं!
वही जगह है जहाँ सब रोज आते थे,
वही जगह है जहाँ छोटी बड़ी खुशियाँ मानते थे,
अब उसी जगह के मौसम बदल गए हैं,
सब लोग बदल गए हैं,
सब चेहरे अब नए हैं!
सब थे परिचित हम से जहाँ,
आज मिलते सब अपरिचित हैं वहां,
कुछ हैं जो अब भी पहचानते हैं,
बाकी सब लोग बदल गए हैं,
सब चेहरे अब नए हैं!
जीवन पथ पर अग्रसर कुछ आगे निकल गए हैं,
कुछ साथी ऐसे हैं जो पीछे छुट गए हैं,
पर हर पग पर साथी कुछ नए भी मिल रहे हैं,
पुराने सब लोग बदल गए हैं,
सब चेहरे अब नए हैं!
परिवर्तन में ही शायद यह सृष्टि समाहित है,
कोई नही है जो परिवर्तन से अप्रभावित है,
इसी के कारण जीवन चक्र चल रहे है,
चाहे सब लोग बदल गए है,
चाहे सब चेहरे नए हैं!!!
The origin point of this poem is my previous office. When I visited it yesterday, I could hardly see anyone known to me, only 3-4 persons were there. Rest all were new.
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